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Home»Uncategorized»दुर्बलों की सेवा एवं ख़ुशी के लिए फलदायी बनना जुबिली का वास्तविक अर्थ: महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद शनिवार, जनवरी 10, 2026, कांके, रांची : आज कांके में स्थित उर्सुलाइन कॉन्वेंट में उर्सुलाइन के चार धर्मबहनों ने अपने समर्पित जीवन का हीरक एवं स्वर्णिम जुबिली मनाया। इस शुभावसर पर राँची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने जुबिली का धन्यवादी मिस्सा बलिदान अर्पित किया । आज उर्सुलाइन की चार धर्मबहनों सिo निर्मला मिंज, सिo सोफी डुंगडुंग, सिo क्लारा डांग एवं सिo आलोसिया सोरेंग ने 60 वर्षों एवं 50 वर्षों के धर्मसंघीय जीवन का हीरक एवं स्वर्णिम जयंती मनाया। सिo आलोसिया सोरेंग अपनी अस्वस्थ के कारण इस धन्यवादी मिस्सा बलिदान में शामिल नहीं हो पाई, किन्तु उनके लिए भी ईश्वर से विशेष प्रार्थना किया गया। इस जयंती के अवसर पर राँची काथलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने धन्यवादी मिस्सा बलिदान अर्पित किया। पवित्र मिस्सा बलिदान का आरंभ समारोही जुलूस के हुआ। तत्पश्चात जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों का जीवन गाथा पढ़ सुनाया गया। उनके जीवन के सेवा कार्यों ने सभी उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद की अगुवाई में समारोही मिस्सा बलिदान आगे बढ़ा। उन्होंने अपने धर्मोपदेश में जुबिली का अर्थ समझाते हुए कहा कि “जरूरतमंदो, ग़रीब और कमजोर लोगों की सेवा करना एवं फलदायक बनकर दूसरों की ख़ुशी व आनंद का कारण बनना ही जुबिली का वास्तविक अर्थ है।” उन्होंने अपने जीवन की घटना का ज़िक्र करते हुए बताया कि ट्रेन में सफ़र करते समय एक बच्चे ने अपने भूख के समय भी बिस्कीट सबसे पहले आसपास बैठे यात्रियों के साथ साझा करने का सोचा। वैसे ही हमारे जीवन को भी दूसरो की भलाई के लिए समर्पित करना है। साथ ही उन्होंने प्रभु येसु ख्रीस्त के मानव जाति के लिए क्रूस पर बलिदान देने से सीखने एवं उसी प्रकार अपने जीवन को दूसरो के लिए समर्पित करने का सन्देश दिया। धर्मोपदेश के बाद तीन उपस्थित जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों ने ब्रह्मचर्य, निर्धनता एवं आज्ञाकारिता के अजीवन व्रत का दुहराव कर नवीनीकरण किया। मिस्सा समाप्ति पर महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दीं। जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों के सम्मान में एक छोटा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित रहा जिसमें उन्हें बधाई गीत गा कर शुभकामनाएं दीं गई। तत्पश्चात सभी लोगों ने उन्हें फूल गुच्छ एवं उपहार दे कर बधाईयां दीं। समर्पित जीवन के जुबिली का यह कार्यक्रम लोगों को चिरकाल तक प्रेरित करता रहेगा कि वे भी जरूरतमंद के लिए अपना जीवन समर्पित कर निः स्वार्थ सेवा देने में सक्षम बन सकते हैं। धर्मबहनों के इस जुबिली के अवसर पर रांची काथलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद, फाo विनोद, फाo रंजीत, सिo ईव जस्टिना रोमल्ड उर्सुलाइन धर्मसमाज की प्रोविंशियल, फ़ाo असीम मिंज अन्य मेहमान पुरोहितगण, धर्मबहनें, जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों के रिश्तेदार और शुभचिंतक शामिल रहे।
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दुर्बलों की सेवा एवं ख़ुशी के लिए फलदायी बनना जुबिली का वास्तविक अर्थ: महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद शनिवार, जनवरी 10, 2026, कांके, रांची : आज कांके में स्थित उर्सुलाइन कॉन्वेंट में उर्सुलाइन के चार धर्मबहनों ने अपने समर्पित जीवन का हीरक एवं स्वर्णिम जुबिली मनाया। इस शुभावसर पर राँची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने जुबिली का धन्यवादी मिस्सा बलिदान अर्पित किया । आज उर्सुलाइन की चार धर्मबहनों सिo निर्मला मिंज, सिo सोफी डुंगडुंग, सिo क्लारा डांग एवं सिo आलोसिया सोरेंग ने 60 वर्षों एवं 50 वर्षों के धर्मसंघीय जीवन का हीरक एवं स्वर्णिम जयंती मनाया। सिo आलोसिया सोरेंग अपनी अस्वस्थ के कारण इस धन्यवादी मिस्सा बलिदान में शामिल नहीं हो पाई, किन्तु उनके लिए भी ईश्वर से विशेष प्रार्थना किया गया। इस जयंती के अवसर पर राँची काथलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने धन्यवादी मिस्सा बलिदान अर्पित किया। पवित्र मिस्सा बलिदान का आरंभ समारोही जुलूस के हुआ। तत्पश्चात जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों का जीवन गाथा पढ़ सुनाया गया। उनके जीवन के सेवा कार्यों ने सभी उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद की अगुवाई में समारोही मिस्सा बलिदान आगे बढ़ा। उन्होंने अपने धर्मोपदेश में जुबिली का अर्थ समझाते हुए कहा कि “जरूरतमंदो, ग़रीब और कमजोर लोगों की सेवा करना एवं फलदायक बनकर दूसरों की ख़ुशी व आनंद का कारण बनना ही जुबिली का वास्तविक अर्थ है।” उन्होंने अपने जीवन की घटना का ज़िक्र करते हुए बताया कि ट्रेन में सफ़र करते समय एक बच्चे ने अपने भूख के समय भी बिस्कीट सबसे पहले आसपास बैठे यात्रियों के साथ साझा करने का सोचा। वैसे ही हमारे जीवन को भी दूसरो की भलाई के लिए समर्पित करना है। साथ ही उन्होंने प्रभु येसु ख्रीस्त के मानव जाति के लिए क्रूस पर बलिदान देने से सीखने एवं उसी प्रकार अपने जीवन को दूसरो के लिए समर्पित करने का सन्देश दिया। धर्मोपदेश के बाद तीन उपस्थित जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों ने ब्रह्मचर्य, निर्धनता एवं आज्ञाकारिता के अजीवन व्रत का दुहराव कर नवीनीकरण किया। मिस्सा समाप्ति पर महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दीं। जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों के सम्मान में एक छोटा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित रहा जिसमें उन्हें बधाई गीत गा कर शुभकामनाएं दीं गई। तत्पश्चात सभी लोगों ने उन्हें फूल गुच्छ एवं उपहार दे कर बधाईयां दीं। समर्पित जीवन के जुबिली का यह कार्यक्रम लोगों को चिरकाल तक प्रेरित करता रहेगा कि वे भी जरूरतमंद के लिए अपना जीवन समर्पित कर निः स्वार्थ सेवा देने में सक्षम बन सकते हैं। धर्मबहनों के इस जुबिली के अवसर पर रांची काथलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद, फाo विनोद, फाo रंजीत, सिo ईव जस्टिना रोमल्ड उर्सुलाइन धर्मसमाज की प्रोविंशियल, फ़ाo असीम मिंज अन्य मेहमान पुरोहितगण, धर्मबहनें, जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों के रिश्तेदार और शुभचिंतक शामिल रहे।

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टJanuary 10, 2026No Comments3 Mins Read0 Views
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शनिवार, जनवरी 10, 2026, कांके, रांची : आज कांके में स्थित उर्सुलाइन कॉन्वेंट में उर्सुलाइन के चार धर्मबहनों ने अपने समर्पित जीवन का हीरक एवं स्वर्णिम जुबिली मनाया। इस शुभावसर पर राँची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने जुबिली का धन्यवादी मिस्सा बलिदान अर्पित किया । उर्सुलाइन की चार धर्मबहनों सिo निर्मला मिंज, सिo सोफी डुंगडुंग, सिo क्लारा डांग एवं सिo आलोसिया सोरेंग ने 60 वर्षों एवं 50 वर्षों के धर्मसंघीय जीवन का हीरक एवं स्वर्णिम जयंती मनाया। सिo आलोसिया सोरेंग अपनी अस्वस्थ के कारण इस धन्यवादी मिस्सा बलिदान में शामिल नहीं हो पाई, किन्तु उनके लिए भी ईश्वर से विशेष प्रार्थना किया गया। इस जयंती के अवसर पर राँची काथलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने धन्यवादी मिस्सा बलिदान अर्पित किया। पवित्र मिस्सा बलिदान का आरंभ समारोही जुलूस के हुआ। तत्पश्चात जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों का जीवन गाथा पढ़ सुनाया गया। उनके जीवन के सेवा कार्यों ने सभी उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद की अगुवाई में समारोही मिस्सा बलिदान आगे बढ़ा। उन्होंने अपने धर्मोपदेश में जुबिली का अर्थ समझाते हुए कहा कि “जरूरतमंदो, ग़रीब और कमजोर लोगों की सेवा करना एवं फलदायक बनकर दूसरों की ख़ुशी व आनंद का कारण बनना ही जुबिली का वास्तविक अर्थ है।” उन्होंने अपने जीवन की घटना का ज़िक्र करते हुए बताया कि ट्रेन में सफ़र करते समय एक बच्चे ने अपने भूख के समय भी बिस्कीट सबसे पहले आसपास बैठे यात्रियों के साथ साझा करने का सोचा। वैसे ही हमारे जीवन को भी दूसरो की भलाई के लिए समर्पित करना है। साथ ही उन्होंने प्रभु येसु ख्रीस्त के मानव जाति के लिए क्रूस पर बलिदान देने से सीखने एवं उसी प्रकार अपने जीवन को दूसरो के लिए समर्पित करने का सन्देश दिया। धर्मोपदेश के बाद तीन उपस्थित जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों ने ब्रह्मचर्य, निर्धनता एवं आज्ञाकारिता के अजीवन व्रत का दुहराव कर नवीनीकरण किया। मिस्सा समाप्ति पर महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दीं। जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों के सम्मान में एक छोटा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित रहा जिसमें उन्हें बधाई गीत गा कर शुभकामनाएं दीं गई। तत्पश्चात सभी लोगों ने उन्हें फूल गुच्छ एवं उपहार दे कर बधाईयां दीं। समर्पित जीवन के जुबिली का यह कार्यक्रम लोगों को चिरकाल तक प्रेरित करता रहेगा कि वे भी जरूरतमंद के लिए अपना जीवन समर्पित कर निः स्वार्थ सेवा देने में सक्षम बन सकते हैं।
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