बोकारो। झारखंड के कुलाधिपति सह माननीय राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने डॉ.उपेंद्र कुमार गुप्ता द्वारा लिखित दो पुस्तक झारखंड गठन और ग्रामीण विकास की रूपरेखा एवं झारखंड परिचयात्मक पृष्ठभूमि और मनरेगा का विमोचन राजभवन में किया। झारखंड ग्रामीण क्षेत्र बहुलता वाला राज्य है इसमें मुख्य रूप से छोटा – नागपुर के पठार एवं संथाल परगना के वन क्षेत्र शामिल हैं। प्रारंभिक काल से ही यह क्षेत्र अविकसित,उपेक्षित, तिरस्कृत एवं जीवन की मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहा है। निरंतर बढ़ती आबादी का घनत्व,बेरोजगारी और निर्धनता के कारण राज्य से पलायन,तीव्र गति से बढ़ती सामाजिक विषमता ,उग्रवाद यह सोचने पर विवश कर देता है कि क्या हम केवल आंकड़ों में ही प्रगति कर रहे हैं।
राज्य गठन के 25 वर्षों के बाद भी ग्रामीण विकास की जटिल चुनौतियां झारखंड के लिए चिंता का विषय है। लेखक का मनना है कि आप जो कुछ भी करेंगे आपको वह नगण्य लगेगा लेकिन यह कहना महत्वपूर्ण है कि संसार में परिवर्तन का प्रारंभ स्वयं से करना होता है। गैलीलियो ने कहा था आप किसी को कुछ सीखा नहीं सकते आप तो बस इसे उसके भीतर खोजने में उसकी मदद कर सकते हैं।हाशिए पर रहने वाले एवं गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाला समुदाय मेरी प्रेरणा का स्रोत रहा है ।इन दो पुस्तकों को लिखने का लेखक का उद्देश्य ग्रामीण जीवन को समझना एवं इसमें सकारात्मक बदलाव लाना है। यह पुस्तक ग्रामीण जीवन की बेहतरी एवं प्रगति के लिए है। इन पुस्तकों के माध्यम से झारखंड के संक्षिप्त इतिहास,झारखंड राज्य से जुड़ी महान विभूति एवं व्यक्तित्व,झारखंड के सभी 24 जिलों का समग्र अवलोकन एवं झारखंड से जुड़ी अनेकानेक ज्ञानवर्धक, सारगर्भित एवं तथ्यात्मक जानकारियां उद्धत की गई हैं ।
साथ ही साथ यह पुस्तक झारखंड में मनरेगा के पृष्ठभूमि,परिचय,मनरेगा के क्रियान्वयन,झारखंड में मनरेगा को प्रभावी बनाने हेतु सुझाव सहित कई समसामयिक मुद्दे पर लाभकारी,विस्तृत एवं व्यवस्थित विवेचना करती है। लेखक ने इन पुस्तकों में कोशिश की है कि झारखंड के समग्र अवलोकन हेतु बेहतर एवं नवीनतम तथ्यों ,आंकड़ों , पहलुओं और विशेष सामग्री को संपूर्ण झारखंड के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास किया है । विश्व की कोई वस्तु पूर्णत: दोष रहित अथवा गुणहीन नहीं होती है, किंतु बुद्धिमान लोग अवगुण को त्याग कर गुण को ग्रहण करते हैं। लेखक से संपर्क करने पर उन्होंने बताया की पुस्तक का लेखन एक चुनौतीपूर्ण कार्य था मैंने इसको पूर्ण सावधानी के साथ करने का हर संभव प्रयास किया है,उम्मीद है कि यह पुस्तक मेरे भाव एवं विचारों को संप्रेषित करने में सफल होगा। लेखक डाक्टर उपेंद्र कुमार गुप्ता जो चास कालेज चास के राजनितिक विज्ञान के सहायक प्राध्यायक है। इनका अभिरुचि अध्ययन अध्यापन शौध एवं लेखन कार्य पर है। इनको कई संस्थानो द्वारा लेखन कार्यो के लिए सम्मानित किया गया है।


